अब कक्षा नौ से लेकर 12 तक चरणबद्ध तरीके से पर्यावरण संरक्षण की होगी पढ़ाई: विद्यार्थी करेंगे जल और जीवन बचाने का पढ़ेंगे पाठ
अब कक्षा नौ से लेकर 12 तक चरणबद्ध तरीके से पर्यावरण संरक्षण की होगी पढ़ाई: विद्यार्थी करेंगे जल और जीवन बचाने का पढ़ेंगे पाठ
पढ़ाई किताबी ज्ञान भर नहीं है, बल्कि सही मायने में मानव बनाने की सतत प्रक्रिया है।’ इस सूत्र वाक्य पर यूपी बोर्ड ने कदम बढ़ाया है। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को अपनाने के साथ ही छात्र-छात्रओं को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने के लिए कई विषयों में पाठ जोड़े गए हैं। कक्षा नौ से लेकर 12 तक उन्हें इसकी चरणबद्ध तरीके से पढ़ाई कराई जाएगी, ताकि वह जागरूक होकर मौजूदा चुनौतियों में निपटने में सक्षम और नदी, पेड़ व जलस्रोतों का संवर्धन करा सकें।1 यूपी बोर्ड के माध्यमिक कालेजों में शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र में पाठ्यक्रम में आमूलचूल बदलाव हुए हैं। बोर्ड ने पहली बार एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को अपनाया है। विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम में मौजूदा परिवेश की चुनौतियों के प्रति छात्रों को जागरूक करने की पहल की है। कक्षा नौ से लेकर 12 तक के विभिन्न विषयों में पर्यावरण की शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। 1’ नदी, पेड़, जलस्रोत के संवर्धन और बाढ़, भूस्खलन आदि रोकने के पाठ 1’ बोर्ड ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को पहली बार अपनाया
यूपी बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भूगोल व सामाजिक विज्ञान विषय में ही इससे जुड़े पाठ नहीं जोड़े है, बल्कि जीव विज्ञान, इतिहास, व्यावसायिक वर्ग तक की पढ़ाई में इस शिक्षा को विस्तार दिया है। इसमें वन कटना, वीरान कर देना, भूस्खलन, जलस्रोत, झील जैसे पाठों को जोड़ा गया है। 1ग्रामीण विकास पर भी दिया जोर 1यूपी बोर्ड ने व्यावसायिक वर्ग में ग्रामीण विकास को भी अपनाया है। इसमें छात्र-छात्रओं को ग्रामीण परिवेश के जन-जीवन की विस्तृत जानकारी के साथ ही उसका विकास कैसे किया जाए। इसकी भी शुरुआती जानकारी दी जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण व आपदा प्रबंधन भी 1बोर्ड के पाठ्यक्रम में आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण नियंत्रण व आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। अग्नि सुरक्षा, तालाब व कुंड संवर्धन जैसे पाठ नए पाठ्यक्रम में शामिल हैं। बोर्ड अफसरों की मानें तो पर्यावरण संरक्षण के चुनिंदा पाठ पहले कुछ कक्षाओं में रहे हैं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस बार उसे विस्तार दिया गया। साथ ही हर कक्षा और तमाम विषयों में इससे जुड़ी पढ़ाई कराई जाएगी। 1कालेजों को देंगे विशेष निर्देश 1यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने कहा है कि पाठ्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता से स्थान देकर बोर्ड ने अपना कार्य कर दिया है। छात्रों को ठीक से पढ़ाने के साथ ही उन्हें जागरूक बनाया जाए इसके लिए कालेजों को अलग से निर्देश जारी करेंगे। उनका प्रयास है कि इस पाठ्यक्रम में सतत सुधार करते हुए बच्चों को बेहतर जानकारी दी जाए।
यूपी बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भूगोल व सामाजिक विज्ञान विषय में ही इससे जुड़े पाठ नहीं जोड़े है, बल्कि जीव विज्ञान, इतिहास, व्यावसायिक वर्ग तक की पढ़ाई में इस शिक्षा को विस्तार दिया है। इसमें वन कटना, वीरान कर देना, भूस्खलन, जलस्रोत, झील जैसे पाठों को जोड़ा गया है। 1ग्रामीण विकास पर भी दिया जोर 1यूपी बोर्ड ने व्यावसायिक वर्ग में ग्रामीण विकास को भी अपनाया है। इसमें छात्र-छात्रओं को ग्रामीण परिवेश के जन-जीवन की विस्तृत जानकारी के साथ ही उसका विकास कैसे किया जाए। इसकी भी शुरुआती जानकारी दी जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण व आपदा प्रबंधन भी 1बोर्ड के पाठ्यक्रम में आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण नियंत्रण व आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। अग्नि सुरक्षा, तालाब व कुंड संवर्धन जैसे पाठ नए पाठ्यक्रम में शामिल हैं। बोर्ड अफसरों की मानें तो पर्यावरण संरक्षण के चुनिंदा पाठ पहले कुछ कक्षाओं में रहे हैं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस बार उसे विस्तार दिया गया। साथ ही हर कक्षा और तमाम विषयों में इससे जुड़ी पढ़ाई कराई जाएगी। 1कालेजों को देंगे विशेष निर्देश 1यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने कहा है कि पाठ्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता से स्थान देकर बोर्ड ने अपना कार्य कर दिया है। छात्रों को ठीक से पढ़ाने के साथ ही उन्हें जागरूक बनाया जाए इसके लिए कालेजों को अलग से निर्देश जारी करेंगे। उनका प्रयास है कि इस पाठ्यक्रम में सतत सुधार करते हुए बच्चों को बेहतर जानकारी दी जाए।
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Reviewed by Anonymous
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April 12, 2018
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