DELED: डीएलएड 2018 में प्रवेश का तीसरा चरण पूरा, डीएलएड की 70 हजार से अधिक सीटें खाली
इलाहाबाद : डीएलएड 2018 में अभ्यर्थियों ने रुचि नहीं दिखाई है। तीसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी करीब 70 हजार से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। इस चरण में कालेजों को सीधे प्रवेश देने का अनुमति दी गई थी लेकिन, वह भी परवान नहीं चढ़ सकी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार रिक्त सीटों की संख्या करीब चार गुना अधिक है।
प्राथमिक स्कूलों के लिए शिक्षक तैयार करने वाले बीटीसी संस्थान जिनका नाम बदलकर डीएलएड हो गया है, की सीटों की संख्या निरंतर बढ़ी है लेकिन, यहां प्रवेश लेने को अभ्यर्थियों ने उत्साह नहीं दिखाया है। यही वजह है कि इस वर्ष 70 हजार 221 सीटें अंतिम चरण में खाली रह गई हैं। खास बात यह है कि शासन ने तीसरे व अंतिम चरण में प्रवेश देने के लिए डायट व निजी कालेजों को सीधे प्रवेश लेने व सभी सीटें सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किया था, यह दांव भी काम नहीं आ सका है। ज्ञात हो कि सात से 13 अगस्त तक सीधे प्रवेश की प्रक्रिया चली और 14 अगस्त की देर रात्रि तक कालेजों ने प्रवेश लेने वालों की सूचना अपलोड की है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की मानें तो अब इन सीटों को भरने के लिए अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद बहुत कम है, हालांकि रिक्त सीटों की संख्या अधिक है इसलिए निजी कालेजों के दबाव में सीधे प्रवेश की समयावधि बढ़ाई भी जा सकती है। डीएलएड 2018 का सत्र पिछले पांच जुलाई से ही शुरू हो चुका है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने बताया कि तीसरे चरण में 39910 अभ्यर्थियों ने विभिन्न कालेजों में प्रवेश लिया है। पहले चरण व ऑनलाइन प्रवेश में ही सबसे अधिक अभ्यर्थियों ने रुचि दिखाई थी। 1बीएड ने भी किया प्रभावित : डीएलएड कालेजों को मान्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानि एनसीटीई से मिलती है। बीते 29 जून को एनसीटीई ने प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए बीएड द्विवर्षीय पाठ्यक्रम को सशर्त मंजूरी दे दी है। अब बीएड करने से प्राथमिक से लेकर माध्यमिक कालेजों तक दावेदारी कर सकते हैं, जबकि डीएलएड केवल प्राथमिक में ही मान्य है।
प्राथमिक स्कूलों के लिए शिक्षक तैयार करने वाले बीटीसी संस्थान जिनका नाम बदलकर डीएलएड हो गया है, की सीटों की संख्या निरंतर बढ़ी है लेकिन, यहां प्रवेश लेने को अभ्यर्थियों ने उत्साह नहीं दिखाया है। यही वजह है कि इस वर्ष 70 हजार 221 सीटें अंतिम चरण में खाली रह गई हैं। खास बात यह है कि शासन ने तीसरे व अंतिम चरण में प्रवेश देने के लिए डायट व निजी कालेजों को सीधे प्रवेश लेने व सभी सीटें सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किया था, यह दांव भी काम नहीं आ सका है। ज्ञात हो कि सात से 13 अगस्त तक सीधे प्रवेश की प्रक्रिया चली और 14 अगस्त की देर रात्रि तक कालेजों ने प्रवेश लेने वालों की सूचना अपलोड की है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की मानें तो अब इन सीटों को भरने के लिए अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद बहुत कम है, हालांकि रिक्त सीटों की संख्या अधिक है इसलिए निजी कालेजों के दबाव में सीधे प्रवेश की समयावधि बढ़ाई भी जा सकती है। डीएलएड 2018 का सत्र पिछले पांच जुलाई से ही शुरू हो चुका है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने बताया कि तीसरे चरण में 39910 अभ्यर्थियों ने विभिन्न कालेजों में प्रवेश लिया है। पहले चरण व ऑनलाइन प्रवेश में ही सबसे अधिक अभ्यर्थियों ने रुचि दिखाई थी। 1बीएड ने भी किया प्रभावित : डीएलएड कालेजों को मान्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानि एनसीटीई से मिलती है। बीते 29 जून को एनसीटीई ने प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए बीएड द्विवर्षीय पाठ्यक्रम को सशर्त मंजूरी दे दी है। अब बीएड करने से प्राथमिक से लेकर माध्यमिक कालेजों तक दावेदारी कर सकते हैं, जबकि डीएलएड केवल प्राथमिक में ही मान्य है।
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Reviewed by CNN World News
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August 17, 2018
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