लोकसभा चुनाव के पहले मुश्किल में 69000 शिक्षक भर्ती, कटऑफ की पेच ने लगाया कोर्ट में ब्रेक, अभी राहत के आसार नहीं
लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती चुनाव के पहले पूरी होनी मुश्किल है। कटऑफ को लेकर कोर्ट में फंसा पेच निकलने का नाम नहीं ले रहा है जबकि अगले महीने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पूरे आसार हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने 69 हजार पदों के लिए विज्ञापन दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी किया था। पिछली भर्ती में आई दिक्कतों के चलते प्रक्रिया में अहम बदलाव किए गए थे।
शासन ने 22 जनवरी को रिजल्ट घोषित करने की तैयारी की थी, जिससे दूसरे चरण में भर्ती के लिए आवेदन लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। विभाग ने पहली भर्ती में सामान्य और ओबीसी के लिए 45% और एससी-एसटी के लिए 40% का कटऑफ तय किया था।
हालांकि, सीटों से कम अभ्यर्थियों के क्वॉलिफाई करने के चलते 26 हजार से अधिक सीटें खाली रह गईं। शासन ने इस बार लिखित परीक्षा होने के बाद 7 जनवरी को नई भर्ती के लिए कटऑफ जारी किया। इसमें सामान्य व ओबीसी के लिए 65% और एससी-एसटी के लिए 60% क्वॉलिफाइंग की कटऑफ रख दी। अब इसको लेकर हाई कोर्ट की लखनऊ और इलाहाबाद बेंच में अलग- अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है लेकिन कोई अंतिम निर्णय न होने के चलते भर्ती परीक्षा का परिणाम ही नहीं जारी हो पा रहा है।
भर्ती के लिए
नहीं मिलेगा वक्त
आयोग के सूत्रों के अनुसार मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के आसार हैं। इसके साथ ही चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। दूसरी ओर अब तक कटऑफ को लेकर कोर्ट में मंथन ही चल रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में यह मामला हल हो जाता है और लिखित परीक्षा का परिणाम जारी भी हो जाता है तो भी भर्ती के लिए वक्त नहीं मिलेगा। अफसरों का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के लिए ही कम से कम एक पखवाड़े का वक्त चाहिए होगा। इसके बाद स्क्रीनिंग और अन्य वैरीफिकेशन व काउंसलिंग में भी एक महीने से कम नहीं लगेंगे। इसलिए शिक्षक भर्ती चुनाव के बाद तक खिंचती नजर आ रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने 69 हजार पदों के लिए विज्ञापन दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी किया था। पिछली भर्ती में आई दिक्कतों के चलते प्रक्रिया में अहम बदलाव किए गए थे।
शासन ने 22 जनवरी को रिजल्ट घोषित करने की तैयारी की थी, जिससे दूसरे चरण में भर्ती के लिए आवेदन लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। विभाग ने पहली भर्ती में सामान्य और ओबीसी के लिए 45% और एससी-एसटी के लिए 40% का कटऑफ तय किया था।
हालांकि, सीटों से कम अभ्यर्थियों के क्वॉलिफाई करने के चलते 26 हजार से अधिक सीटें खाली रह गईं। शासन ने इस बार लिखित परीक्षा होने के बाद 7 जनवरी को नई भर्ती के लिए कटऑफ जारी किया। इसमें सामान्य व ओबीसी के लिए 65% और एससी-एसटी के लिए 60% क्वॉलिफाइंग की कटऑफ रख दी। अब इसको लेकर हाई कोर्ट की लखनऊ और इलाहाबाद बेंच में अलग- अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है लेकिन कोई अंतिम निर्णय न होने के चलते भर्ती परीक्षा का परिणाम ही नहीं जारी हो पा रहा है।
भर्ती के लिए
नहीं मिलेगा वक्त
आयोग के सूत्रों के अनुसार मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के आसार हैं। इसके साथ ही चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। दूसरी ओर अब तक कटऑफ को लेकर कोर्ट में मंथन ही चल रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में यह मामला हल हो जाता है और लिखित परीक्षा का परिणाम जारी भी हो जाता है तो भी भर्ती के लिए वक्त नहीं मिलेगा। अफसरों का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के लिए ही कम से कम एक पखवाड़े का वक्त चाहिए होगा। इसके बाद स्क्रीनिंग और अन्य वैरीफिकेशन व काउंसलिंग में भी एक महीने से कम नहीं लगेंगे। इसलिए शिक्षक भर्ती चुनाव के बाद तक खिंचती नजर आ रही है।
लोकसभा चुनाव के पहले मुश्किल में 69000 शिक्षक भर्ती, कटऑफ की पेच ने लगाया कोर्ट में ब्रेक, अभी राहत के आसार नहीं
Reviewed by CNN World News
on
February 20, 2019
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