बजट का बोझ बढ़ाए बिना शिक्षक व कर्मचारियों को कैसे खुश किया जाता है यह सीखें बोर्ड से
प्रयागराज : बजट का बोझ बढ़ाए बिना शिक्षक व कर्मचारियों को कैसे खुश किया जाता है। यह यूपी बोर्ड से सीखना होगा। इसीलिए उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने के दौरान शासन ने बोर्ड के प्रस्ताव को मंजूरी देने में ज्यादा वक्त भी नहीं लगाया और उसका सुखद परिणाम यह रहा है कि कॉपियों का मूल्यांकन तेज गति से हो रहा है। अब केवल 35 प्रतिशत कॉपियों का जांचा जाना शेष है।
शासन ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले यूपी बोर्ड के पारिश्रमिक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें परीक्षा केंद्रों पर केंद्र व्यवस्थापक, शिक्षक से लेकर मूल्यांकन तक की दरों में बदलाव किया गया है। हर स्तर पर भुगतान बढ़ाया गया है। जिसका लाभ परीक्षा कार्य में जुटे तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी मिलना है। असल में पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग लंबे समय से चल रही थी। पहले बोर्ड ने लंबित भुगतान दिलाने में रुचि दिखाई वह कार्य पटरी पर आते ही पारिश्रमिक दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजकर उसे इसी सत्र से लागू कर दिया है।
असल में, यूपी बोर्ड में अब हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं महीनों नहीं चलती बल्कि उनकी मियाद तय हो गई है कि हाईस्कूल 14 व इंटर की परीक्षा 16 दिन। इस बार तमाम अवकाश के कारण कुछ अधिक समय जरूर लगा, अगले वर्षो में समय सीमा और कम होगी।
यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि हाईस्कूल की तरह इंटर के 39 अहम विषयों में एक प्रश्नपत्र की ही परीक्षा हुई है। इसके अलावा लगातार परीक्षा केंद्रों की संख्या कम हुई, क्योंकि केंद्र की क्षमता का अधिकाधिक उपयोग हुआ। उत्तर पुस्तिका में पेज बढ़ाकर कॉपियों की संख्या कम की गई है। साथ ही एक प्रश्नपत्र होने से वैसे भी कॉपियां घटी हैं। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष करीब पांच करोड़ कॉपियां थी इस बार घटकर तीन करोड़ बीस लाख रह गई है। इसीलिए मूल्यांकन भी तेजी से हो रहा है।
पारिश्रमिक बढ़ने से केंद्र व्यवस्थापक व शिक्षकों को कमोबेश पहले की तरह ही लाभ ही होगा, असली फायदा तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को होना है, क्योंकि उनकी तादाद कम है और भुगतान बढ़ गया है। यह दरें बढ़ने से यूपी बोर्ड शिक्षकों व अन्य को सार्थक संदेश देने में जरूर सफल रहा है।
शासन ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले यूपी बोर्ड के पारिश्रमिक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें परीक्षा केंद्रों पर केंद्र व्यवस्थापक, शिक्षक से लेकर मूल्यांकन तक की दरों में बदलाव किया गया है। हर स्तर पर भुगतान बढ़ाया गया है। जिसका लाभ परीक्षा कार्य में जुटे तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी मिलना है। असल में पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग लंबे समय से चल रही थी। पहले बोर्ड ने लंबित भुगतान दिलाने में रुचि दिखाई वह कार्य पटरी पर आते ही पारिश्रमिक दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजकर उसे इसी सत्र से लागू कर दिया है।
असल में, यूपी बोर्ड में अब हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं महीनों नहीं चलती बल्कि उनकी मियाद तय हो गई है कि हाईस्कूल 14 व इंटर की परीक्षा 16 दिन। इस बार तमाम अवकाश के कारण कुछ अधिक समय जरूर लगा, अगले वर्षो में समय सीमा और कम होगी।
यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि हाईस्कूल की तरह इंटर के 39 अहम विषयों में एक प्रश्नपत्र की ही परीक्षा हुई है। इसके अलावा लगातार परीक्षा केंद्रों की संख्या कम हुई, क्योंकि केंद्र की क्षमता का अधिकाधिक उपयोग हुआ। उत्तर पुस्तिका में पेज बढ़ाकर कॉपियों की संख्या कम की गई है। साथ ही एक प्रश्नपत्र होने से वैसे भी कॉपियां घटी हैं। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष करीब पांच करोड़ कॉपियां थी इस बार घटकर तीन करोड़ बीस लाख रह गई है। इसीलिए मूल्यांकन भी तेजी से हो रहा है।
पारिश्रमिक बढ़ने से केंद्र व्यवस्थापक व शिक्षकों को कमोबेश पहले की तरह ही लाभ ही होगा, असली फायदा तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को होना है, क्योंकि उनकी तादाद कम है और भुगतान बढ़ गया है। यह दरें बढ़ने से यूपी बोर्ड शिक्षकों व अन्य को सार्थक संदेश देने में जरूर सफल रहा है।
बजट का बोझ बढ़ाए बिना शिक्षक व कर्मचारियों को कैसे खुश किया जाता है यह सीखें बोर्ड से
Reviewed by CNN World News
on
March 19, 2019
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